प्रातःकालीन उद्यान में हाथ जोड़े खड़े श्रीराम और लक्ष्मण, तथा उन्हें आशीर्वाद देते हुए गुरु विश्वामित्र
यह चौपाई श्रीरामचरितमानस के बालकाण्ड में आती है।

सुमन पाइ मुनि पूजा कीन्ही। पुनि असीस दुहु भाइन्ह दीन्ही॥ सुफल मनोरथ होहुँ तुम्हारे। रामु लखनु सुनि भय सुखारे॥

यह चौपाई बालकाण्ड पुष्पवाटिका से पुष्प लाने पर विश्वामित्रजी का आशीर्वाद है।
भावार्थ : फूल पाकर मुनि ने पूजा की। फिर दोनों भाइयों को आशीर्वाद दिया कि तुम्हारे मनोरथ सफल हों। यह सुनकर राम-लक्ष्मण सुखी हुए।

शलाका उत्तर के रूप में इसका भाव

गुरु का आशीर्वाद होने से यह अत्यंत शुभ उत्तर माना जाता है। प्रश्न बहुत उत्तम है और मनोरथ सफल होगा; श्रद्धा बनाए रखें और बड़ों का आशीर्वाद लेकर कार्य आरम्भ करें।

प्रसंग: यह चौपाई श्रीरामचरितमानस में कहाँ है?

बालकाण्ड में श्रीराम और लक्ष्मण गुरु विश्वामित्रजी की पूजा के लिए पुष्पवाटिका से फूल लेकर आते हैं। पुष्प पाकर मुनि ने पूजा की और प्रसन्न होकर दोनों भाइयों को आशीर्वाद दिया: तुम्हारे मनोरथ सफल हों। यह सुनकर श्रीराम और लक्ष्मण सुखी हुए।

श्रीरामचरितमानस में पूरा प्रसंग पढ़ेंश्रीरामचरितमानस (जिसे तुलसी रामायण भी कहा जाता है) में इस चौपाई का पूरा प्रसंग पढ़ें।

शब्दार्थ

सुमन
पुष्प
मुनि
गुरु विश्वामित्र
पुनि
फिर
असीस
आशीर्वाद
दुहु भाइन्ह
दोनों भाइयों को
सुफल मनोरथ
मनोरथ सफल हों
सुखारे
प्रसन्न हुए

रोमन लिप्यंतरण

Suman Pai Muni Puja Kinhi। Puni Asis Duhu Bhainh Dinhi॥ Sufal Manorath Hohun Tumhare। Ramu Lakhanu Suni Bhaye Sukhare॥

रोमन लिपि में यह चौपाई ‘Sufal Manorath Hohun Tumhare’ या ‘Sufal Manorath Hoye Tumhare’ के रूप में भी लिखी जाती है। वर्तनी भिन्न हो सकती है, चौपाई वही है।

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