श्री रामायण शलाका प्रश्नावली की मूल चौपाइयाँ

यहाँ वे 8 पूर्ण मूल चौपाइयाँ हैं जिनसे श्री रामायण शलाका प्रश्नावली की 9 उत्तर-पंक्तियाँ बनती हैं। प्रत्येक चौपाई को ऑडियो, संदर्भ और भावार्थ सहित पढ़ें।
गोस्वामी तुलसीदास, शिखा और तिलक धारण किए हुए, शांत नदी के किनारे श्री रामचरितमानस लिखते हुए
9 अर्धालियाँ, 8 मूल चौपाइयाँ

इन चौपाइयों को केवल पढ़ें नहीं, उनके पूर्ण प्रसंग को भी समझें

श्री राम शलाका प्रश्नावली का हर उत्तर अंततः 9 अर्धालियों से आता है, जो 8 मूल चौपाइयों से ली गई हैं। इसलिए यह पेज केवल सूची नहीं, बल्कि उन उत्तरों के भक्तिपरक, साहित्यिक और व्यावहारिक संदर्भ को समझने का माध्यम है।
  • हर उत्तर एक ही परंपरा से
    शलाका के सभी उत्तर श्रीरामचरितमानस की इन चुनिंदा चौपाइयों से आते हैं। इसलिए इनका बार-बार पढ़ना पूरे अनुभव को अधिक स्पष्ट बनाता है।
  • प्रसंग से अर्थ गहराता है
    किस अध्याय में चौपाई आती है और किस स्थिति में कही गई है, यह जानने पर उसका मार्गदर्शन कहीं अधिक अर्थपूर्ण हो जाता है।
  • सुनें, पढ़ें और मनन करें
    ऑडियो, पाठ और भावार्थ को साथ में देखने से उत्तर जल्दीबाज़ी में नहीं, बल्कि शांति और श्रद्धा से ग्रहण किया जा सकता है।

उत्तर देने वाली 8 मूल चौपाइयाँ

इस पेज पर वे 8 पूर्ण मूल चौपाइयाँ दी गई हैं जिनसे शलाका के उत्तर आते हैं। इनमें से एक पूर्ण चौपाई दो अलग उत्तर-पंक्तियों का स्रोत है, इसलिए ग्रिड से आने पर वह दो अलग उत्तर-पेजों से दिखाई दे सकती है।
१. सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥ नारद बचन सदा सुचि साचा। सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा॥
चौपाई का भावार्थ देखें
२. प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥ गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
चौपाई का भावार्थ देखें
३. लखि सुबेष जग बंचक जेऊ। बेष प्रताप पूजिअहिं तेऊ॥ उघरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू॥
चौपाई का भावार्थ देखें
४. सठ सुधरहिं सतसंगति पाई। पारस परस कुधात सुहाई॥ बिधि बस सुजन कुसंगत परहीं। फनि मनि सम निज गुन अनुसरहीं॥
चौपाई का भावार्थ देखें
५. होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥ अस कहि लगे जपन हरिनामा। गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥
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६. मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू॥ राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा। सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा॥
चौपाई का भावार्थ देखें
७. बरुन कुबेर सुरेस समीरा। रन सन्मुख धरि काहुँ न धीरा॥ भुजबल जितेहु काल जम साईं। आजु परेहु अनाथ की नाईं॥
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८. सुमन पाइ मुनि पूजा कीन्ही। पुनि असीस दुहु भाइन्ह दीन्ही॥ सुफल मनोरथ होहुँ तुम्हारे। रामु लखनु सुनि भय सुखारे॥
चौपाई का भावार्थ देखें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री राम शलाका की चौपाइयों के बारे में सामान्य प्रश्न

यदि आप पहली बार इन चौपाइयों को पढ़ रहे हैं, तो ये उत्तर शलाका प्रश्नावली के स्वरूप और उपयोग को अधिक स्पष्ट करेंगे।
और गहराई से समझें

श्री राम शलाका को और अच्छी तरह समझें

यदि आप केवल उत्तर देखना नहीं, बल्कि उसके पीछे की परंपरा और अर्थ को समझना चाहते हैं, तो इन मार्गदर्शक पेजों से शुरुआत करें।
  • श्री राम शलाका क्या है?
    प्रश्नावली की परंपरा, बनावट और आध्यात्मिक उद्देश्य को सरल रूप में समझें।
  • उत्तर का अर्थ कैसे समझें?
    उत्तर मिलने के बाद उसे श्रद्धा, प्रसंग और विवेक के साथ कैसे पढ़ें, यह जानें।