यह चौपाई श्रीरामचरितमानस के बालकाण्ड में आती है।

गिरिजा मंदिर में हाथ जोड़े खड़ी माता सीता को माता गौरी का आशीर्वाद, साथ में उनकी सखियाँ भी उपस्थित

सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥ नारद बचन सदा सुचि साचा। सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा॥

यह चौपाई बालकाण्ड में श्रीसीताजी के गौरीपूजन के प्रसंग में है। गौरीजी ने श्रीसीताजी को आशीर्वाद दिया है।
भावार्थ : हे सीता! हमारी सच्ची आसीस सुनो, तुम्हारी मनःकामना पूरी होगी। नारद का वचन सदा पवित्र (संशय, भ्रम आदि दोषों से रहित) और सत्य है। जिसमें तुम्हारा मन अनुरक्त हो गया है, वही वर तुमको मिलेगा।

प्रसंग: यह चौपाई श्रीरामचरितमानस में कहाँ है?

बालकाण्ड के पुष्पवाटिका प्रसंग के बाद श्रीसीताजी अपनी सखियों के साथ गिरिजा (गौरी) मंदिर में पूजन करने जाती हैं। श्रीराम के दर्शन से उनका मन प्रभु के चरणों में अनुरक्त हो चुका है, और वे माता गौरी से मन ही मन अपनी कामना निवेदन करती हैं। तब गौरीजी स्वयं आशीर्वाद देती हैं: सुनो सीता, हमारी आशीष सत्य होगी; नारदजी के वचन सदा पवित्र और सत्य हैं; जिसमें तुम्हारा मन अनुरक्त है, वही वर तुम्हें मिलेगा।

श्रीरामचरितमानस (जिसे तुलसी रामायण भी कहा जाता है) में इस चौपाई का पूरा प्रसंग पढ़ें।

श्रीरामचरितमानस में पूरा प्रसंग पढ़ें

रोमन लिप्यंतरण

Sunu Siya Satya Asis Hamari. Pujihi Man Kamana Tumhari.. Narad Bachan Sada Suchi Sacha. So Baru Milihi Jahin Manu Racha..

रोमन लिपि में यह चौपाई ‘Sunu Siya Satya Asis Hamari’, ‘Sun Siya Satya Ashish Hamari’ या ‘Suni Siya Satya Ashish Hamari’ के रूप में भी लिखी जाती है। वर्तनी भिन्न हो सकती है, चौपाई वही है।

शब्दार्थ

  • असीस = आशीर्वाद
  • पूजिहि = पूर्ण होगी
  • मन कामना = हृदय की इच्छा
  • सुचि साचा = पवित्र और सत्य
  • बरु = वर
  • मनु राचा = जिसमें मन अनुरक्त है

शलाका उत्तर के रूप में इसका भाव

गौरीजी का यह आशीर्वाद शलाका के सबसे शुभ उत्तरों में गिना जाता है। इसका भाव है कि प्रश्नकर्त्ता की कामना उत्तम है और श्रद्धा बनाए रखने पर कार्य सिद्ध होगा, जैसे श्रीसीताजी की मनोकामना पूर्ण हुई।

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